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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2015

क्या होता यदि मोदीजी का अपनी पत्नी से रिश्ता होता.

.रिश्ता होता तो आज मोदीजी किसी पत्नी पीड़ित इंसान की तरह किसी बियर बार में बैठकर अपना ग़म गलत कर रहे होते और सिर्फ अपनी ही समस्याओं को सुलझाने में उलझे होते..फिर न देश मोदी को जानता और न दुनिया जानती..और मोदी न सीएम होते न पीएम...और देश की बड़ी समस्याएं किसी अन्य मोदी के इंतजार में होतीं
..मैं नहीं जानता उनके बीच ऐसा क्या हुआ था जो उन्हें अलग होना पड़ा..लेकिन आज मोदी के जलवे, दूरदर्शिता और तुरत व सटीक निर्णय लेने के जज्बे को देखते हुए ये कहना पड़ता है कि...Once upon a time Modi has taken a well decision.

लट्ठमार माफी

लोगों के 'आशीर्वाद' से जिंदगी में हम बहुत आगे पहुंच आये हैं जहां भी गये जिसके पास भी गये लोगों ने कहा आगे जा..आगे जा..पर अफसोस मंजिल अभी भी बाकी है..पर पता नहीं क्यूं बिना कोई अपराध किये ही हर रोज सैकड़ों लोग हमसे माफी मांगते रहते हैं..कहते हैं...माफ करो...वैसे माफी मांगना विनम्रता का पर्याय होता है मगर एक बात समझ में आजतक नहीं आयी कि अस्सी फीसदी (शायद फिसड्डी) लोग कुछ इस तरह से माफी मांगते हैं जैसे कि डांट रहे हों..जिसे कह सकते हैं लट्ठमार माफी..जब माफी ऐसे मांगते हैं तो ये माफी देते कैसे होंगे..ये मारने की यदि सोच लें तो बिना अस्पताल गये ही टिकट कट जायेगी..समझ में नहीं आयी कि ये ऐसे माफी क्यों मांगते है भला?